अपनी शक्ल से जो जाहिर है मिटाए कैसे
तुम्हे जैसा चाहिए नज़र आए कैसे

घर सजाने की बात तो बहुत दूर की है
पहले यह तय हो की इस घर को बचाए कैसे

अपनी शक्ल से जो जाहिर है मिटाए कैसे
तुम्हे जैसा चाहिए नज़र आए कैसे

लाख तलबारे आती हो गले की तरफ
सिर झुकना नही आता झुकाए कैसे

पूल से रंग जुदा होना कोई खेल नही
अपने प्यार को मिटा के जाए कैसे

अपनी शक्ल से जो जाहिर है मिटाए कैसे
तुम्हे जैसा चाहिए नज़र आए कैसे

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