आठवाँ रंग

0, April 2, 2010
Posted by Ashish Vishwakarma
वो हमारी जिंदगी में खुशी और चेहरे पर मुस्कान ले आते हैं,
ना जाने वो कहाँ से ये जादू और कहाँ से जिंदगी ले आते हैं.

हम तो सोचते थे की दुनिया तो सिर्फ़ सफेद और काली है,
ना जाने वो सात रंग के सपने कहाँ से ले आते हैं.


सोचता है ये आशीष भी अक्सर की क्यूँ जिंदगी इतनी खुशनुमा है,
शायद भगवान भी कभी कभी जिंदगी ढूढ़ लाते हैं.

करते है हम परवाह उनकी की जितनी की कोई सोच नही सकता,
और वो हमसे पूछते हैं अक्सर क ये आठवाँ रंग कहाँ से ले आते हो

सूरज की रोशिनी और चाँद की चाँदनी भी पढ़ जाती है फीकी उनके सामने,
और वो कहते है ये अल्फ़ाज़ कहाँ से ले आते हो.

उनकी खुशियाँ की खूबसूरती और उनके गम के आँसू भी है अनमोल हुमको,
और वो कहते हैं की इतनी चाहते कहाँ से लाते हो.

सोच सोच कर कभी वो भी तक जाते हैं की इतना प्यार हम कहाँ से ले आते हैं,
क्यूंकी कभी कभी भगवान ब जिंदगी ढूढ़ लाते हैं

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.