आज क्यूँ लगा ऐसा की जैसे कोई हमारा दिल वापिस कर गया
कह गया की हम नही इस लायक इसलिए ये मकान खाली कर गया

ना जाने इस जिंदगी के सफ़र में क्या रुक पाएँगे कभी
शायद चलना है जिंदगी भर और ना ख़तम होगा इंतेजार कभी


बैठ जाता है दिल तक कर कभी उनके बारे में सोचकर
फिर भी ना जाने ये पागल दिल क्यूँ करता है उनका इंतेजार

सच जानते हुए भी अंजान बनने की कोशिश करते हैं हम
जिंदगी को जूठा कहकर आंगे बढ़ने की कोशिश करते हैं हम

आज बहुत कोशिसों के बावजूद भी दुखा है दिल हमारा
हिम्मत भी हार गयी आज हमारी शायद कुछ टूटा है हमारा

अब तो टूट ते तारे पर भी यकीन नही रहा हमें
पर ये पागल दिल आज भी माँगता हैं खुदा से सिर्फ़ उन्हे

सब कुछ जानकार भी अंजान बने रहना चाहते हैं हम
इंसान हैं पर फिर भी खुदा बनकर जीना चाहते हैं हम

क्यूँ एक सपना टूट जाने के बाद नये सपने दिखता है ये दिल
क्या फिर आजमाना चाहता है खुदा दिलाने के पहले मंज़िल

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