उनसे क्या कहें क्या चाहत है हमारी
क्या हम माँगते हैं क्या इबादत है हमारी

उन्हे ही तो हम ये बता नही पाते
उनकी खुशी ही तो राहत है हमारी

दिल के दरिया मे हर गम डूब जाना चाहता है
मुसकराना अब हमारा दिल भी चाहता है

वो पूछते हैं और क्या चाहते हो
उनकी खुशी मे ही मुस्कुराना तो आदत है हमारी

जाने कब ये इलतेजा होगी पूरी
कब मिटेगी हमसे उनकी ये दूरी

मिलने का इंतेज़ार हमेशा दिल करता है
दिल की एक यही हसरत है हुमारी

जब कभी उनका साया भी पास होता है
धूप मे भी छाँव का एहसास होता है

उनकी परछाई मे छुपने की कोशिश करते हैं
उनमे खोना ही बस अब चाहत है हमारी

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