
क्या चाहत है हमारी
0, April 25, 2010
उनसे क्या कहें क्या चाहत है हमारी
क्या हम माँगते हैं क्या इबादत है हमारी
उन्हे ही तो हम ये बता नही पाते
उनकी खुशी ही तो राहत है हमारी
दिल के दरिया मे हर गम डूब जाना चाहता है
मुसकराना अब हमारा दिल भी चाहता है
वो पूछते हैं और क्या चाहते हो
उनकी खुशी मे ही मुस्कुराना तो आदत है हमारी
जाने कब ये इलतेजा होगी पूरी
कब मिटेगी हमसे उनकी ये दूरी
मिलने का इंतेज़ार हमेशा दिल करता है
दिल की एक यही हसरत है हुमारी
जब कभी उनका साया भी पास होता है
धूप मे भी छाँव का एहसास होता है
उनकी परछाई मे छुपने की कोशिश करते हैं
उनमे खोना ही बस अब चाहत है हमारी
