ये इश्क तेरे अंत पर रोना आया
पता नही क्यो तेरे नाम पर रोना आया

बैसे तो हर रात यादो मे गुजर जाती थी
आज कुछ बात है ,जो रात पर रोना आया

कभी मुक्कदर का दुख ,कभी दुनिया का गम
मंजिले-इश्क के हर गम पे रोना आया

जब हुई बात जमाने मे मोहब्बत की सानू
मुझको अपने दिले नाकाम पे रोना आया

ये इश्क तेरे अंत पर रोना आया
पता नही क्यो तेरे नाम पर रोना आया

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