याद आती थी जब उनकी
ना जाने क्या हो रहा है हमारे और उनके साथ
क्यूँ ले रही हैं जिंदगी इम्तहान हमारे और उनके साथ
अभी अभी तो जीना सीखा था हमने बहुत ठोक्रों के बाद
तो फिर आज क्यूँ वो रहे हैं वो परेशान हमारे जाने के बाद
याद आती थी जब उनकी तो कर लेते थे बातें हम उनसे सपनों में
आज जब नींद ही नही आती हमारे तो कैसे मिले उनसे ख्वाबों में
अगर इतना आसान होता जिंदगी का चलते जाना तो कितना सही होता
ना होते वो और हम परेशान और ना दिल हुमारा दुख़्ता
कोशिश तो हमने की बहुत की भुला देंगे उनकी याडून को अपने दिल से
पर कोई ये हमने ये बताये की कैसे धड़कनो को अलग करे दिल से
आज भी लगता है बुरा हूमें बहुत जब होता है कोई उनके करीब
शायद भगवान ने हूमें कर रखा है प्यार से ग़रीब
नये सपने हम भी सजाने की कोशिश करते हैं बहुत अक्सर
पर दिल तो सुनता ही नही किसी की तो कैसे रहे ये उनसे बेख़बर
हमने सोचा की अब नही ब्ताएंगे दिल की बात उनसे कभी
पर कैसे छुपाएँ जो बस्ते हैं इसी दिल में…………..

